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गरीबों के गले का फंदा बना परिवार पहचान पत्र।

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  हरियाणा सरकार इन दिनों डिजिटलाइजेशन पर खूब जोर दे रही है जिससे जनता को सारी सुविधाएं मुहैया कराई जा सके इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्र बनाने की घोषणा की थी। सरकार का कहना था कि परिवार पहचान पत्र का सहारा लेकर गरीब लोगों की छंटनी की जाएगी और उन लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई पड़ती है।  दरअसल हरियाणा सरकार जिस परिवार पहचान पत्र से लोगों को सहूलियत देने की बात करती है वही परिवार पहचान पत्र अब लोगों के लिए फांसी का फंदा बन गया है एक तरफ जहां सरकार ने परिवार पहचान पत्र का दायरा बढ़ाने का ऐलान किया तो वहीं दूसरी तरफ इससे न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बढ़ा बल्कि जनता को भी लघु सचिवालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अगर बात हम सिर्फ साइबर सिटी गुरुग्राम की करें तो यहां न जाने कितने ऐसे लोग हैं जो पिछले कई महीनों से लघु सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। साथ ही परिवार पहचान पत्र में गलत इनकम को आधार मानकर गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों के राशन कार्ड तक काट लिए गए।  आपको बता...

भारत में बढ़ती Period poverty

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  स्वच्छ, आत्मनिर्भर, शिक्षित और विकसित भारत की बात तो सभी करते हैं, लेकिन स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और विकास के पथ पर कोई चलना नहीं चाहता। हमारे देश में महिलाएं प्राचीन काल से वर्तमान के आधुनिक काल तक चर्चा का विषय रही है। समाज में जब भी सुधारों की बात की जाती है तो महिलाओं के प्रति सुधार पहली प्राथमिकता के तौर पर सामने आता है। सती प्रथा से लेकर विधवा पुनर्विवाह तक, कर्मकांडो से लेकर शिक्षा तक, सभी क्षेत्रों में हम महिलाओं की समानता व हक के लिए आवाज उठाते हैं। लेकिन महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े सभी पहलुओं को हम नजरअंदाज कर देते हैं। महिलाओं का  अस्वस्थ होना आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। पूरे विश्व में लगभग 62% ऐसी महिलाएं हैं जो अपने स्वास्थ्य के प्रति या तो जागरुक नहीं है, या ध्यान ही नहीं देती। पीरियड पाॅवर्टी एक ऐसा ही विषय है जिसे हमारा समाज लंबे अरसे से नजरअंदाज करता आ रहा है। ज ब कम आय वाले लोग पीरियड प्रोडक्ट्स (जैसे टैम्पोन, सेनेटरी पैड) को नहीं खरीद पाते या उन तक अपनी पहुंच नहीं बना पाते तो इसे पीरियड पाॅवर्टी कहा जाता है। भारत में पीरियड  पाॅवर्टी ...

World Tiger day

 आज हम 12वा  World Tiger day  मना रहे हैं। हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर बाघों की प्रजाति विलुप्त हो रही है. बाघ की प्रजाति को बचाने के लिए और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए ही इस दिन को मनाया जाता है।  इंटरनेशनल टाइगर डे की शुरुआत साल 2010 में रूस के पीटर्सबर्ग में आयोजित किए गए इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में की गई थी. इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में 13 देशों ने भाग लिया था, जिन्होंने 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था।  अपने जंगलों, पशु - पक्षियों और पर्यावरण से समृद्धि भारत इकलौता देश है, जहां बाघ और शेर दोनों पाए जाते हैं. लेकिन देश में यह दोनों प्रजातियां हैं खतरे में है। हमारे देश में बाघों की 8 प्रजातियां हुआ करती थी, परंतु इनके शिकार की वजह से अब सिर्फ 5 प्रजातियां ही रह गई है -  साइबेरियन टाइगर, बंगाल टाइगर, indo-chinese टाईगर, मिलियन टाइगर और सुमत्रन टाइगर की प्रजातियां हमारे देश में है, और बाकी की प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है। 2018 की जनगणना की बात करें तो देश में सबसे ज्यादा 526 भाग मध्य प्रद...

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस

 पृथ्वी अपने आप में नायाब वस्तुओं को समेटे हुए हैं, इन्हीं में से एक है पर्वत। पर्वतों को धरती का मुकुट कहा जाता है। कहीं बर्फ से ढके तो कहीं हरे-भरे यह पहाड़ खूबसूरत नजारा देते हैं। इनकी खूबसूरती जहां हमें प्रकृति के करीब लाती है वहीं, यह हमें आश्रय भी देती है। विश्व की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अपने आश्रय के लिए इन्हीं पर्वतों पर निर्भर है। फल-फूल ,जड़ी-बूटी, आवास, कृषि और ना जाने ऐसे कितने कामों पर हम पर्वतों पर निर्भर हैं। पर्वतों की इन्हीं निर्भरता को देखते हुए हर साल 11 दिसंबर को International mountain day मनाया जाता हैै, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी इन पर्वतों का महत्व समझ कर इन्हें संरक्षित करने में मदद कर सके। वनो से घिरे और बर्फ से ढके पहाड़ हमारे लिए प्रकृति का अनमोल तोहफा है, जिसे  बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। पर्वतों का जिक्र होते ही भारत का भी जिक्र होता है। भारत को पर्वतों का देश कहा जाता है। भारत में प्राचीन काल से ही पर्वतों का महत्व बताया गया है। हमारे देश की कई पौराणिक पुस्तकों जैसे गीता, रामायण, उपनिषादस और वेदों में भी इनकी चर्चा की गई है। भगवत गीता में पर...

भारत में वैवाहिक बलात्कार

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वैवाहिक बलात्कार                                     भारत मे घरेलू हिंसा के लगातार बढ़ते मामले देखे जा रहे है। घरेलू हिंसा भारत मे आम सी बात हो गयी है। हाँल ही मे National Crime Recode Bureau ने   Crime in India  नाम से एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसके तहत भारत मे 70 % महिलाएं घरेलू हिंसा से पीडित है, जिसमें से 30 % से ज्यादा महिलाएं वैवाहिक बलात्कार का शिकार है। वैवाहिक बलात्कार को घरेलू हिंसा के अंतर्गत शामिल किया जाता है। भारत मे वैवाहिक बलात्कार अन्य अपराधो की तरह ही तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस पुरूष प्रधान समाज मे विवाह के बाद महिलाओ के जिवन पर पुरूषो के द्वारा अपना अधिकार समझना ऐसी हिंसा के प्रमुख कारण है। जब महिला की सहमती के बगैर उस के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाए जाते है तो यह वैवाहिक बलात्कार के अंतर्गत आता है। य़ह कानूनी रूप से अपराध है। कई देशो मे इस पर कडी सजा का भी प्रावधान है परंतु भारत मे, यदि पती अपनी पत्नी की मर्जी के बगैर यौन संबमध बनाता है तो इसे वैवाहिक बलात्कार नह...
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                                                            भारत के वीर नेताजी  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की कहानी भारत ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में उनके संघर्ष को लेकर जानीं जाती है। नेताजी की कहानी एक ऐसे युवा की कहानी है जिसके जोश और जुनून ने पूरे देश में स्वतंत्रता की लहर उठाई। एक ऐसा महान व्यक्तित्व जो विश्व में कभी-कभी जन्म लेता है। जिसे कुछ भी मुफ्त में मंजूर नहीं आज़ादी भी चाही तो अपने खुन के दम पर। अंग्रेजो के खिलाफ नेता जी ने भारत को आजाद कराने के लिए जो प्रयास किया उसके लिए पूरा देश आज भी उन्हें याद करता है। उनका दिया नारा "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा" , "जय हिंद" जैसे नारे आज भी देश के हर नागरिक की जुबान पर है। 23 जनवरी 1897 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म कटक (उड़ीसा) में हुआ। उन्होंने उच्च शिक्षा कोलकाता के प्रेसिडेंसी और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से प्राप्त की। 1920 में इंग्लैंड में सिविल सर्विस परीक्षा में नेताजी...

भारत में शिक्षा और इंटरनेट से अछूती महिलाएं

  भारत में शिक्षा और इंटरनेट से अछूती महिलाएं  इंटरनेट आज के समय में मानव की एक अहम जरूरत बन चुका है। विश्व में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने इंटरनेट के बारे में ना सुना हो और ना इसे कभी इस्तेमाल किया हो। इंटरनेट की खोज विश्व की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक है। बच्चों से लेकर जवान और बुजुर्गों तक इंटरनेट का बोलबाला है परंतु यदि हम भारत में महिलाओं और इंटरनेट की बात करें तो यह आंकड़ा विश्व की तुलना में डरा देने वाला है। भारत में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है कि यहां 12 राज्यों की केवल 40 फीसद महिलाएं ही इंटरनेट का उपयोग करती है और 60 फीसद महिलाएं इंटरनेट से अछूती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2020 में आई यह रिपोर्ट भारत में महिलाओं की स्थिति, साक्षरता और तकनीक के प्रति उनकी रुचि को साफ व्यक्त करती है। इस रिपोर्ट में महिलाओं की साक्षरता से महिलाओं के इंटरनेट के प्रयोग को जोड़ा गया है।   21वीं सदी के भारत में आज भी महिलाओं की स्थिति ज्यादा सुधरती नजर नहीं आ रही है। आज भी बहुत से ऐसे राज्य हैं, शहर हैं, कस्बे हैं जहां महिला...