भारत में वैवाहिक बलात्कार

वैवाहिक बलात्कार



                                    भारत मे घरेलू हिंसा के लगातार बढ़ते मामले देखे जा रहे है। घरेलू हिंसा भारत मे आम सी बात हो गयी है। हाँल ही मे National Crime Recode Bureau ने  Crime in India  नाम से एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसके तहत भारत मे 70% महिलाएं घरेलू हिंसा से पीडित है, जिसमें से 30% से ज्यादा महिलाएं वैवाहिक बलात्कार का शिकार है। वैवाहिक बलात्कार को घरेलू हिंसा के अंतर्गत शामिल किया जाता है। भारत मे वैवाहिक बलात्कार अन्य अपराधो की तरह ही तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस पुरूष प्रधान समाज मे विवाह के बाद महिलाओ के जिवन पर पुरूषो के द्वारा अपना अधिकार समझना ऐसी हिंसा के प्रमुख कारण है।

जब महिला की सहमती के बगैर उस के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाए जाते है तो यह वैवाहिक बलात्कार के अंतर्गत आता है। य़ह कानूनी रूप से अपराध है। कई देशो मे इस पर कडी सजा का भी प्रावधान है परंतु भारत मे, यदि पती अपनी पत्नी की मर्जी के बगैर यौन संबमध बनाता है तो इसे वैवाहिक बलात्कार नही माना जाता। इस तरह के कानूनो पर भारत मे सजा का कोई प्रावधान नही है। यही कारण हे कि भारत मे बलात्कार जैसे अपराध तेजी से बढ़ते जा रहा है। देश मे वैवाहिक बलात्कार पर कानून बनाने की माग लंबे समय से चलती आ रही है परंतु देश मे धर्म के नाम पर इस मुद्दे को हर बार दबा दिया जाता है। इंडिया टुडे वेब डेस्क द्वारा सन् 2016 मे एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिसके तहत भारत विश्व के उन 36 देशो मे शामिल है जहाँ विवाह जैसे पवित्र बंधन की आड़ मे ऐसे अपराधो को अंजाम दिया जाता है। भारत जैसे बडे लोकतांत्रिक देश मे इस विषय पर केवल अप्राकृतिक यौन संबंध और पत्नी के साथ विकृत साधनो के जरिए किया गया संभोग को ही बलात्कार की श्रेणी मे रखा जाता है।

भारत में वैवाहिक बलात्कार के कानूनो की मागँ समय-सनय पर उठाई जाती रही है परंतू इस जैसे गंभीर मुद्दे पर अबी तक भी हमारे पास कोई कानून नही है। सुप्रीम कोर्ट मे 1996 से कई याचिकाएँ दायर की गई जिसमे IPC की धारा 375 मे बदलाव की मागँ की गई और बलात्कार से संबंधित नियमो को भी बढ़ाने की मागँ भी उठी। सुप्रीम कोर्ट ने सन् 2004 मे इन याचिकाओ को खारीज करते हुए इस मिद्दे पर संसद को कानून बनाने के कहा। कोर्ट ने साफ किया की इस मुद्दे पर कानून बनाने का हक केवल संसद को ही है। देश मे निर्भया गैग रेप और बलात्कार के बढ़ते मुद्दो को देखते हुए इस पर कानूनो को कुछ कठोर अवश्य किया गया पर वैवाहिक बलातिकार के मुद्दे पर फिर भी कोई संज्ञान नही लिया गया। वर्तमान की केंद्र सरकार ने इस कानून पर दलिल दी कि यदि इस तरह का कोई कानून लाया गया तो महिलाएँ पुरूषो पर झूठे मुकद्मे भी लगा सकती है। इस जैसे गंभीर विषय पर बिना सोचे समझे इस प्रकार कही बात देश की न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खडा करती है।



वैवाहिक बलात्कार ऐसे अपराधो मे शामिल है जिसे कानून की मंजूरी है। हमारे देश मे पुरूषो और महिलाओ के बिच विवाह के संबंध को संभोग के लिए सहमती समझ लिया जाता है जिससे पुरूषो मे ऐसे अपराध का भय खत्म हो जाता है। वर्ष 2013 मे संयुक्त राष्ट्र समिति ने भारत सरकार को वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित करने का सुझाव दिया था। इसके अलावा 2012 के निर्भया बलात्कार के बाद जेएस वर्मा समिति ले भी सरकार को यही कुझाव दिया परंतु अभी तक इस विषय पर कोइ खास कानून बनता नज़र नही आ रहा है। बारत मे लोकतंत्र की मजबूती और अपराध को कम करने के लिए इस तरह के कानूनो को अमल मे लाने की जरूरत है।  


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