World Tiger day

 आज हम 12वा  World Tiger day  मना रहे हैं। हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर बाघों की प्रजाति विलुप्त हो रही है. बाघ की प्रजाति को बचाने के लिए और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए ही इस दिन को मनाया जाता है। 

इंटरनेशनल टाइगर डे की शुरुआत साल 2010 में रूस के पीटर्सबर्ग में आयोजित किए गए इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में की गई थी. इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में 13 देशों ने भाग लिया था, जिन्होंने 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था। 

अपने जंगलों, पशु - पक्षियों और पर्यावरण से समृद्धि भारत इकलौता देश है, जहां बाघ और शेर दोनों पाए जाते हैं. लेकिन देश में यह दोनों प्रजातियां हैं खतरे में है। हमारे देश में बाघों की 8 प्रजातियां हुआ करती थी, परंतु इनके शिकार की वजह से अब सिर्फ 5 प्रजातियां ही रह गई है -  साइबेरियन टाइगर, बंगाल टाइगर, indo-chinese टाईगर, मिलियन टाइगर और सुमत्रन टाइगर की प्रजातियां हमारे देश में है, और बाकी की प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है। 2018 की जनगणना की बात करें तो देश में सबसे ज्यादा 526 भाग मध्य प्रदेश में पाए गए. मध्य प्रदेश को ही टाइगर स्टेट का दर्जा भी प्राप्त है।

 इसके अलावा कर्नाटक 524, उत्तराखंड 442, महाराष्ट्र 321, तमिलनाडु 264, असम 190, केरल 190, उत्तर प्रदेश 173, राजस्थान 91, पश्चिम बंगाल 88, अरुणाचल प्रदेश 69, ओडीशा 28, आंध्र प्रदेश 48, और गोवा में 3 बाघ है।  

बाघ की प्रजाति को बचाने के लिए भारत ने बड़े स्तर पर काम किया है 2018 में भारत में 2963 से ज्यादा बाघ थे। 

बाघों को संरक्षण देने के लिए भारत सरकार ने 1973 में टाइगर प्रोजेक्ट शुरू किया था. उस समय देश में सिर्फ 8 अभ्यारण थे. लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 53 हो चुकी है। भारत का सबसे पुराना नेशनल पार्क उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क है, जो 1973 में बनाया गया था. तो वही राजस्थान का रामगढ़ विषधारी नेशनल पार्क और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान 53वा सबसे नया नेशनल पार्क है। इसके अलावा देश के सबसे बड़े नेशनल पार्क की बात करें तो नागार्जुन सागर- श्रीशैलम आंध्र प्रदेश है, जो 3568 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

बाघों के अवैध शिकार, जंगलों की अंधाधुंध कटाई, वनों में खाने की कमी और इनके आवास को नुकसान पहुंचाने की वजह से यह जानवर लुप्त होते जा रहे हैं. बाघों का उनकी खाल, नाखून और दांत के लिए सबसे ज्यादा शिकार किया जाता है. देश में कड़े कानून होने के बावजूद भी इन जानवरों का शिकार किया जाता है. हम आए दिन शिकारियों को पकड़ने की घटनाएं सुनते हैं, लेकिन फिर भी इन घटनाओं में कमी नहीं आ रही है।







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