भारत में ई-स्पोर्टस् की स्थिति

 

भारत मे E – sport’s  की स्थिति

ई-स्पोर्टस् सबसे कम समय में लोकप्रिय होनें वालें खेलों में से एक है। किसी भी स्पोर्टस् के प्रचलन में व लोगों के बिच उसे लोकप्रिय होने में थोड़ा समय लगता है परंतु ई-स्पोस्ट्स एक ऐसा स्पोट् है जिसने बहुत कम समय मे लोगो के बीच अपनी लोकप्रियता बनाई है। मनुष्य के मस्तिष्क ने तकनीकों का विकास किया और तकनीक ने मानव के मस्तिष्क को ही प्रभावित करना शुरू कर दिया। पहले जहाँ खेलो को शारिरिक गतिविधि का हिस्सा माना जाता था वही अब के बदलते युग में खेलों का अर्थ केवल शारिरिक गति करना ही नहीं अपितु मानसिक गति करना भी है। पहले के समय में खेलो के प्रकार के रुप में केवल आउट्डोर गेम्स् को ही रखा जाता था परंतु आज तकनिक के इस बदलते युग में आउट्डोर गेम्स् के साथ-साथ इंडोर गेम्स् को भी शामिल किया जाता है। आज तकनिक का प्रभाव हम केवल मानव पर ही नही बल्कि उसके द्वारा किए जानें वाले क्रियाकलापों पर भी देख सकतें है। तकनीक के इस विकास नें मानव जीवन की गतिविधियों को पूरी तरह से बदल दिया है।

आज के समय में जब हम खेलों की चर्चा करते है तो हमारे पास इसका एक और प्रकार ई-स्पोर्टस् भी सामने आता है। ई-स्पोर्टस् अर्थात आँनलाइन स्पोर्ट्स। आँनलाइन स्पोर्ट्स आज के समय में सबसे प्रचलित स्पोर्ट्स है। ई-स्पोर्टस् ने बाकि अन्य स्पोर्ट्स की तुलना में तेजी से मानव के मस्तिष्क पर अपनी पौठ बनाई है। आज बच्चो से लेकर बड़ो तक सभी इससें प्रभावित है। संसार में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो खेल के इस प्रकार से अनभिग्य हो। सबसे पहले ई-स्पोर्टस् का आयोजन सन् 1972 में स्टौनर्फोड यूनिवर्सिटी में किया गया था। ई-स्पोर्टस् की अधिक लोकप्रियता के कारण कई देशों में आधिकारिक तौर पर इसे माम्यता दी गई है। चीन में सन् 2003 में इसके बढ़ते महत्व को देखते हुए चीन की सरकार की तरफ सें इसे आउटडोर गेम्स के साथ गेम के एक और प्रकार इंडोर गेम में शामिल किया गया। चीन, अमेरिका, कोरिया, जापान, ब्राजील, जर्मनी जैसे कई देशो ने इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया।

ई-स्पोर्टस् की बढ़ती लोकप्रियता का कारण ट्विटर, यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम को भी माना जा सकता है। ई-स्पोर्टस् की प्रतियोगताओं कें आयोजन का प्रचार इन प्लेटफार्म पर अधिक किया जाता है, जिससे अधिक-से-अधिक लोग इन प्रतियोगताओं के बारे में जान कर इसमें भाग लेते है। ई-स्पोर्टस् का प्रचलन सन् 1990 में इंटरनेट के विकास के साथ और बढ़ गया जब आँनलाइन स्ट्रिमिग प्रचलन में आई।

ई-स्पोर्टस् पूरे विश्व में तेजी से प्रचलित हुआ तथा अपनी एक अलग पहचान बनाई। यदि हम भारत की बात करें तो हमे यहाँ इसका काफी प्रचलन देखने को मिलता है। भारत में ई-स्पोर्टस् का प्रचलन भी अन्य देशों की ही भाँति है। भारत की एक बहुत बड़ी जनसंख्या इससे प्रभावित है। ई-स्पोर्टस् की बढ़ती लोकप्रियता के कारण नई-नई कंपनीयों के द्वारा इसका विस्तार किया जा रहा है। परंतु जब हम भारत में ई-स्पोर्टस् की बात करते है तो हम देखते है कि यहाँ कि आबादी का एक बहुत बडा हिस्सा इसे पसंद करता है, खेलता है व इससे प्रभावित है परंतु ई-स्पोर्टस् के निर्माण की बात करने पर हम पाते है कि यहाँ की कंपनियों द्वारा इसके निर्माण का प्रतिशत अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। जापान, कोरिया, चीन जैसे अन्य देशो की भाँति भारत में ई-स्पोर्टस् को स्पोर्टस् का दर्जा नही दिया गया है। भारत मे इसे इंडोर गेम्स के अंदर इसे अभी तक शामिल नही किया गया।

वक्त और तकनित के साथ बदलना ही विकास है। भारत में ई-स्पोस्ट्स को लेकर अभि तक कोई साकारात्मक विचार सामने नही आए है। यही कारण है कि यहाँ खेले जाने वाले प्रत्येक गेम विदेशी होते है। भारत में ई-स्पोस्ट्स के लिए अलग से कोई विज़ा उपलबध ना होने के कारण हर साल ई-स्पोस्ट्स प्रतियोगिताओं के आयोजन में भारत के गेमरों के द्वारा भाग नही लिया जाता, जो गेमरो के लिए एक बड़ी समस्या है। आँनलाइन गेमिग वर्तमान में ताजी से प्रचलित होती जा रही है। इसके बढ़ते प्रचलन के कारण ही भारत मे भी इसका प्रचार आवश्यक है। भारत मे इसके महत्व को समझते हुए इसका समर्थन करना चाहिए तथा इसके प्रतार के लिए लोगो को सहयोग करना चाहिए।

    

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