कोरोना वायरस और महिलाओ की बिगड़ती स्थिति

                      कोरोना वायरस और महिलाओं की बिगड़ती स्थिति

दुनिया भर मे कोरोना महामारी के चलते लाँकडाउन और करफ्यू जैसी स्थितियाँ उत्पनन हो गयी है। देश ही नही बल्कि पूरा विश्व इस महामारी से प्रभावित है। कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर के कामकाज ढप्प पड़ चुके है। दुनिया भर के सभी देशो में इस महामारी के कारण आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक आदि कार्य थम से गये है। कोरोना महामारी के चलते सभी लोग अपने घरो मे रहने को मजबूर है। विश्व के सभी देशो की जीडीपी इस महामारी के कारण घटती जा रही है वही, दुसरी तरफ दुनिया भर में महिलओ के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है। महिलाओं के खिलाफ इस बढ़ती हिंसा का कारण कोरोना वायरस को माना जा रहा है। कोरोना वायरस के कारण समाज मे आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ रहा है, जिसके कारण पुरूषो मे हिंसा की भावना उत्पनन हो रही है। पूरे विश्व मे जहाँ सरकारे कोरोना महामारी से बचने के लिए प्रयास कर रही है, वही दूसरी तरफ महिलाओ के प्रति बढती हिंसा चिंता का विष्य बन चुकि है। महिलाओ की सुरक्षा पहले ही पूरे समाज के लिए चिंता का विष्य था और अब यह मुद्दा और अधिक बडी मुसीबत के रूप मे हमारे सामने आ खड़ा हुआ है। क्योकि यह मुद्दा पूरे विश्व मे चिंता का विष्य बना हुआ है इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा महिलाओ के अधिकारो की रक्षा करने के लिए और महिलाओ से जुडी इन हिंसाओ को रोकने के लिए Inter – Agency statement on volince against Woman and Girls in the context of covid-19  कि शुरूआत की है। इसके तहत महिलाओं से जुडी हिंसा को रोकने के लिए 6 अहम क्षेत्रो मे कार्यवाही किए जाने की रूपरेखा तैयार की गई है। जो इस प्रकार है-

 

सदस्य राष्ट्रों से अपील- संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओ के खिलाफ बढती हिंसा को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशो से अपील की है और सदस्य देशो को नेश्नल रिस्पाँन्स प्लैन्स आँफ कोविड-19 ( national response plane of covide-19)  का हिस्सा बनने को कहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने महिलाओ के प्रति बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए महिला अधिकारों के संघटन का निर्माण किया है तथा इस संघटन को निरंतर जारी रखने के लिए तत्काल और लचीली धनराशि उपलब्ध कराने की बात कही है।

महिलाओं और लडकियों के खिलाफ हिंसा के लिए देखभाल के अपने कर्तव्य को जारि रखने के लिए स्वास्थय और सामाजिक सेवाओ का समर्थन करें और सुलभ रहें।

यह सुनिश्चित करें की महिलाओं और लडकियों के खिलाफ हिंसा के लिए आवश्यक पहलुओ को अपनाया जाएँ।

सभी सदस्य देशो से अपिल करते हुए संयुक्त राष्ट संघ ने पुलिस और न्याय प्रक्रियाओं पर उच्य प्राथमिकता रखनें की बात कही।

निवारक उपायो को जगह मे रखें।

केवल डाटा एकत्र करें यदि यह स्पष्ट है कि इसकी आवश्यकता है, तो इसका उपयोग सेवाओं और कार्यक्रमों को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगाँ व इसके साथ ही नैतिक और सुरक्षा के मानको को भी पूरा किया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने इन नियमो के साथ सदस्य देशो से इन नियमो के पालन की अपिल की है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ती इस हिंसा को कम करने के लिए तथा महिलाओं को जागरूक करने लिए भारत सरकार के द्वारा महिला सुरक्षा हैल्प लाइन नम्बर भी बनाया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा पूरे विश्व मे चिंता का विष्य है। आज के आधुनिक समाज में भी यह मुद्दा ज्यों का त्यों बना हुआ है। किसी भी देश की तरक्की उस देश के लोगो की तरक्की से होती है और महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिसां उस तरक्की में सबसे बडी बाधा है, जिसे दूर करना हर देश के लिए जरूरी है। आज भलें ही पूरे विश्व में महिला सशक्तिकरण के लिए कई संगढन काम कर रहें हो परंतु आज भी समाज में महिलाओ की स्थिती सामान्य बनी हुई है। महिलाओ कें प्रति बढ़ती हुई हिंसा को कम करनें के लिए जागरूकरता के स्तर कों बढ़ाने की आवश्यकता है।
    

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